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रिश्तों का दूसरा नाम ही समझौतें करना है - अघोरी अमली सिंह




                                         
                          रिश्तों का दूसरा नाम ही समझौतें करना है
                             बहुत कुछ त्याग करना पड़ता है
                                   इनको पाने के लिए
                          सहमे हुए दिल को समझाना पड़ता है
                           आँखों के पानी को छुपाना पड़ता है
                                  हर गम भूलना पड़ता है
                            कदम से कदम मिलाने के लिए
                                इस दवाखाने में दवाई नहीं
                                 मुस्कान मिलती है  साहब
                           जो  दिल को  राहत देती जाती है
                                  जिंदगी जीने के लिए
                      कहे अघोरी अमली  वो रिश्ते रिश्ते नहीं जहॉ
                               सम्पति धन का मोह घनघोर हो
                                उनको ध्वस्त करना ही जरुरी है
                              कीचड़ मे कमल खिलाने के लिए
               दरारों को भर खुशियों से भरा एक आसमान सजाने के लिए
                            रिश्तों का दूसरा नाम ही  समझौतें करना है
                                बहुत कुछ त्याग करना पड़ता है
                                     इनको पाने के लिए

                                   अघोरी अमली सिंह 

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